10वीं कक्षा - हिंदी प्रश्न-उत्तर (पाठ 16 - 19)
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पाठ - 16: ठेले पर हिमालय (डॉ. धर्मवीर भारती)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. लेखक कौसानी क्यों गए थे?
उत्तर: हिमालय की बर्फ़ को बहुत निकट से देख पाने के लिए लेखक कौसानी गए थे।
प्रश्न 2. बस पर सवार लेखक ने साथ-साथ बहने वाली किस नदी का ज़िक्र किया है?
उत्तर: बस पर सवार लेखक ने साथ-साथ बहने वाली कोसी नदी का ज़िक्र किया है।
प्रश्न 3. कौसानी कहाँ बसा हुआ है?
उत्तर: सोमेश्वर की घाटी के उत्तर में जो ऊँची पर्वतमाला है, उस पर, बिल्कुल शिखर पर कौसानी बसा हुआ है।
प्रश्न 4. लेखक और उनके मित्रों की निराशा और थकावट किस के दर्शन से छूमंतर हो गई?
उत्तर: लेखक और उनके मित्रों की निराशा और थकावट हिम दर्शन से छूमंतर हो गई।
प्रश्न 5. लेखक और उनके मित्र कहाँ ठहरे थे?
उत्तर: लेखक और उनके मित्र डाक बंगले में ठहरे थे।
प्रश्न 6. दूसरे दिन घाटी से उतरकर लेखक और उनके मित्र कहाँ पहुँचे?
उत्तर: दूसरे दिन घाटी से उतरकर लेखक और उनके मित्र बैजनाथ पहुँचे, जहाँ गोमती नदी बहती है।
प्रश्न 7. बैजनाथ में कौन-सी नदी बहती है?
उत्तर: बैजनाथ में गोमती नदी बहती है।
तीन-चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. लेखक को ऐसा क्यों लगा जैसे वे ठगे गए हैं?
उत्तर: कौसानी के अड्डे पर जाकर जब बस रुकी तो छोटा-सा, बिल्कुल उजड़ा-सा गाँव और बर्फ़ का कहीं नाम-निशान न देखकर लेखक को ऐसा लगा कि जैसे वे ठगे गए हैं।
प्रश्न 2. सबसे पहले बर्फ़ दिखाई देने का वर्णन लेखक ने कैसे किया है?
उत्तर: लेखक को सबसे पहले बर्फ़ बादलों के टुकड़े जैसी लगी थी, जिसका अजब-सा रंग था - न सफ़ेद, न रूपहला और न ही हल्का नीला, पर तीनों का ही आभास देता हुआ रंग था। फिर अचानक लेखक के मन में विचार आया कि हिमालय की बर्फ़ को ही बादलों ने ढाँप रखा है। उसे ऐसा लगा कि जैसे कोई छोटा-सा बाल स्वभाव वाला शिखर बादलों की खिड़की से झाँक रहा है।
प्रश्न 3. खानसामे ने सबको खुशकिस्मत क्यों कहा?
उत्तर: क्योंकि उनके आते ही उन्हें बर्फ़ दिखाई दे गई थी। उनसे पहले 14 टूरिस्ट वहाँ आए थे। वे हफ़्ते भर बर्फ़ का इंतज़ार करते रहे लेकिन उन्हें बर्फ़ नहीं दिखी थी। इसलिए खानसामे ने सब मित्रों को खुशकिस्मत कहा।
प्रश्न 4. सूरज के डूबने पर सब गुमसुम क्यों हो गए थे?
उत्तर: सूरज के डूबने पर सब गुमसुम इसलिए हो गए थे क्योंकि जिस हिम दर्शन की आशा में वे काफ़ी समय से टकटकी लगाकर देख रहे थे, उनकी यह इच्छा मिट्टी में मिल गई थी।
प्रश्न 5. लेखक ने बैजनाथ पहुँच कर हिमालय से किस रूप में भेंट की?
उत्तर: लेखक ने बैजनाथ पहुँच कर देखा कि वहाँ पर गोमती नदी बह रही थी। गोमती की उज्ज्वल जलराशि में हिमालय की बर्फीली चोटियों की छाया तैर रही थी। लेखक ने इस जल में तैरते हुए हिमालय से जी भर कर भेंट की।
छह या सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. कोसी से कौसानी तक में लेखक को किन-किन दृश्यों ने आकर्षित किया?
उत्तर: 1) सुडौल पत्थरों पर कल-कल करती हुई कोसी, किनारे के छोटे-छोटे सुंदर गाँव और हरे मखमली खेत। 2) सोमेश्वर की सुंदर घाटी 3) छोटे-छोटे पहाड़ी डाकखाने, चाय की दुकानें और कभी-कभी कोसी या उसमें गिरने वाले नदी-नालों पर बने हुए पुल। 4) सोमेश्वर घाटी के उत्तर में ऊँची पर्वतमाला, जिसके शिखर पर बसा कौसानी। 5) पर्वतमाला के अंचल में पचासों मील चौड़ी कत्यूर की घाटी। 6) हरे मखमली कालीनों जैसे खेत, सुंदर गेरू की शिलाएँ काटकर बने हुए लाल-लाल रास्ते, जिनके किनारे सफ़ेद-सफ़ेद पत्थरों की कतार और इधर-उधर से आकर आपस में उलझ जाने वाली बेलों की लड़ियों-सी नदियाँ। 7) हरे खेत, नदियाँ और वन जो क्षितिज के धुँधलेपन में, नीले कोहरे में घुल रहे थे। 8) बादल के एक टुकड़े के हटते ही हिम दर्शन 9) पिघलते केसर जैसा ग्लेशियरों में डूबता सूर्य। 10) लाल कमल के फूलों जैसी बर्फ़। कोसी से कौसानी तक इन सभी दृश्यों ने लेखक को आकर्षित किया।
प्रश्न 2. लेखक को ऐसा क्यों लगा कि वे किसी दूसरे ही लोक में चले आए हैं?
उत्तर: सोमेश्वर की घाटी से चलने पर उत्तर दिशा में जब लेखक को कौसानी दिखाई दिया तो उसने देखा कि सामने की घाटी में अपार सौंदर्य बिखरा हुआ था। पर्वतमाला ने अपने अंचल में कत्यूर की रंग-बिरंगी घाटी छिपा रखी थी। पचासों मील चौड़ी यह घाटी, हरे मखमली कालीनों जैसे खेत, सुंदर गेरू की शिलाएँ काटकर बने हुए लाल-लाल रास्ते, जिनके किनारे सफ़ेद-सफ़ेद पत्थरों की कतार और इधर-उधर से आकर आपस में उलझ जाने वाली बेलों की लड़ियों-सी नदियाँ। इन सभी दृश्यों को देखकर लेखक को ऐसा लगा कि वे किसी दूसरे ही लोक में चले आए हैं।
प्रश्न 3. लेखक को 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक कैसे सूझा?
उत्तर: लेखक को इस शीर्षक को बिल्कुल भी ढूँढना नहीं पड़ा। यह शीर्षक उसके मन में बैठे-बिठाए तब आया, जब वह एक पान की दुकान पर अपने अल्मोड़ावासी मित्र के साथ खड़ा था कि तभी ठेले पर बर्फ़ की सिलें लादे हुए बर्फ़ वाला आया। ठंडी, चिकनी, चमकती बर्फ़ से भाप उड़ रही थी। वे क्षणभर उस बर्फ़ को देखते रहे, उठती हुई भाप में खोए रहे और खोए-खोए से ही बोले,"यही बर्फ़ तो हिमालय की शोभा है।" और तभी लेखक को 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक सूझ गया।
पाठ - 17: श्री गुरु नानक देव जी (डॉ. सुखविन्द्र कौर बाठ)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. गुरु नानक देव जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा को सन् 1469 ई. में ज़िला शेखूपुरा के तलवंडी (अब पाकिस्तान) गाँव में हुआ।
प्रश्न 2. गुरु नानक देव जी के माता और पिता का क्या नाम था?
उत्तर: गुरु नानक देव जी के माता का नाम तृप्ता देवी और पिता का नाम मेहता कालू था।
प्रश्न 3. गुरु नानक देव जी ने छोटी आयु में ही कौन-कौन सी भाषाओं का ज्ञान अर्जित कर लिया था?
उत्तर: गुरु नानक देव जी ने छोटी आयु में ही पंजाबी, फ़ारसी, हिंदी तथा संस्कृत भाषाओं का ज्ञान अर्जित कर लिया था।
प्रश्न 4. गुरु नानक देव जी को किस व्यक्ति ने दुनियावी तौर पर जीविकोपार्जन संबंधी कार्यों में लगाने का प्रयास किया था?
उत्तर: गुरु नानक देव जी को उनके पिता मेहता कालू जी ने दुनियावी तौर पर जीविकोपार्जन संबंधी कार्यों में लगाने का प्रयास किया था।
प्रश्न 5. गुरु नानक देव जी को दुनियादारी में बाँधने के लिए इनके पिता जी ने क्या किया?
उत्तर: गुरु नानक देव जी को दुनियादारी में बाँधने के लिए आपके पिता जी ने आपकी शादी देवी सुलखनी से कर दी।
प्रश्न 6. गुरु नानक देव जी के कितनी सन्तानें थीं और उनके नाम क्या थे?
उत्तर: गुरु नानक देव जी के दो सन्तानें थीं। उनके नाम लखमी दास और श्री चंद थे।
प्रश्न 7. इस्लामी देशों की यात्रा के दौरान आपने किस धर्म की शिक्षा दी?
उत्तर: इस्लामी देशों की यात्रा के दौरान आपने सांझे धर्म की शिक्षा दी।
प्रश्न 8. 'श्री गुरु ग्रंथ' साहिब में गुरु नानक देव जी के कुल कितने पद और श्लोक हैं?
उत्तर: 'श्री गुरु ग्रंथ' साहिब में गुरु नानक देव जी के कुल 974 पद और श्लोक हैं।
प्रश्न 9. श्री गुरु ग्रंथ साहिब में मुख्य कितने राग हैं?
उत्तर: श्री गुरु ग्रंथ साहिब में मुख्य 31 राग हैं।
प्रश्न 10. गुरु नानक देव जी के जीवन के अन्तिम वर्ष कहाँ बीते?
उत्तर: गुरु नानक देव जी के जीवन के अन्तिम वर्ष करतारपुर में बीते, जो अब पाकिस्तान में है।
प्रश्न 11. गुरु नानक देव जी के जन्म के संबंध में भाई गुरदास जी ने कौन-सी तुक लिखी?
उत्तर: भाई गुरदास जी ने लिखा था- 'सुनी पुकार दातार प्रभु, गुरु नानक जग माहिं पठाया।'
प्रश्न 12. गुरु नानक देव जी पढ़ने के लिए किन-किन के पास गए थे?
उत्तर: सात वर्ष की आयु में गुरु नानक देव जी को पांडे के पास पढ़ने के लिए भेजा गया। मौलवी सैय्यद हुसैन और पंडित बृजनाथ ने भी उन्हें पढ़ाया। छोटी-सी आयु में ही इन्होंने पंजाबी, फ़ारसी, हिंदी, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था।
तीन-चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. साधुओं की संगति में रहकर गुरु नानक देव जी ने कौन-कौन से ज्ञान प्राप्त किए?
उत्तर: साधुओं की संगति में रहकर गुरु नानक देव जी ने भारतीय धर्म और विभिन्न संप्रदायों का ज्ञान प्राप्त किया। भारतीय धर्म ग्रंथों और शास्त्रों का भी ज्ञान आपको साधुओं की संगति से मिला।
प्रश्न 2. गुरु नानक देव जी ने यात्राओं के दौरान कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण शहरों की यात्रा की?
उत्तर: गुरु नानक देव जी ने यात्राओं के दौरान आसाम, लंका, ताशकंद, मक्का- मदीना आदि शहरों की यात्रा की। आपने हिमालय पर स्थित योगियों के केंद्रों की भी यात्रा की। आपने हिंदू, मुसलमान सब को सही मार्ग दिखाया।
प्रश्न 3. गुरु नानक देव जी ने तत्कालीन भारतीय जनता को किन बुराइयों से स्वतन्त्र कराने का प्रयास किया?
उत्तर: गुरु नानक देव जी ने तत्कालीन भारतीय जनता को धार्मिक आडंबरों तथा संकीर्णताओं से स्वतंत्र कराने का प्रयास किया। उन्होंने भारतीय जनता के सामने वास्तविक सत्य को प्रस्तुत कर दिया, जिससे संकीर्ण विचार और आडंबर अपने आप ही ढीले पड़ गए।
प्रश्न 4. गुरु नानक देव जी की रचनाओं के नाम लिखें?
उत्तर: गुरु नानक देव जी की रचनाएँ जपुजी साहिब, आसा दी वार, सिद्ध गोष्टि, पट्टी, दक्खनी ओंकार, पहरे- तिथि, बारह माह, सुचज्जी-कुचज्जी, आरती आदि हैं।
छह या सात वाक्यों में उत्तर
प्रश्न 1. जिस समय गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ, उस समय भारतीय समाज की क्या स्थिति थी?
उत्तर: जिस समय गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था, उस समय भारतीय समाज में अनेक बुराइयाँ थीं। समाज अनेक जातियों, संप्रदायों और धर्मों में बंटा हुआ था। लोग रूढ़ियों में फँसे हुए थे। उनके विचार बहुत ही संकीर्ण थे। वे घृणा करने योग्य कार्यों में लगे रहते थे। धर्म के नाम पर दिखावे का बोलबाला था। आम जनता का बहुत शोषण होता था। दलितों पर बहुत अत्याचार होते थे।
प्रश्न 2. गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्राओं के दौरान कहाँ-कहाँ और किन-किन लोगों को क्या उपदेश दिए?
उत्तर: श्री गुरु नानक देव जी ने 1499 ई. से लेकर 1522 ई. के समय में पूर्व, पश्चिम, उत्तर तथा दक्षिण दिशाओं में चार उदासियाँ (यात्राएँ) कीं। इन यात्राओं में आपने क्रमशः आसाम, मक्का मदीना, लंका तथा ताशकन्द तक की यात्राएँ कीं। इसी समय के दौरान ही आपने करतारपुर नगर बसाया। यात्राओं के दौरान ही आपने कई स्थानों पर उचित उपदेश द्वारा भटके हुए जनमानस को सुरुचिपूर्ण मार्ग दर्शाया। कश्मीर के पंडितों से विचार-विमर्श किया। हिमालय पर योगियों को सही धर्म सिखाया तथा योगी सिद्धों को जन-सेवा का उपदेश दिया। हिंदुस्तान में घूमते समय आपका अनेक पीरों-फ़कीरों, सूफ़ी-संतों के साथ भी तर्क-वितर्क हुआ। मौलवी व मुसलमानों को आपने सही रास्ता दिखाया। इस्लामी देशों में यात्राओं द्वारा आपने 'साँझे' धर्म की शिक्षा दी। लगभग बाईस वर्ष आप घूम फिर कर धर्म का प्रचार करते रहे।
पाठ - 18: सूखी डाली (एकांकी) - उपेंद्रनाथ अश्क
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. दादा मूलराज के बड़े पुत्र की मृत्यु कैसे हुई?
उत्तर: दादा मूलराज के बड़े पुत्र की मृत्यु 1914 के महायुद्ध में सरकार की ओर से लड़ते-लड़ते हुई।
प्रश्न 2. 'सूखी डाली' एकांकी में घर में काम करने वाली नौकरानी का क्या नाम था?
उत्तर: घर में काम करने वाली नौकरानी का नाम रजवा था।
प्रश्न 3. बेला का मायका किस शहर में था?
उत्तर: बेला का मायका लाहौर शहर में था।
प्रश्न 4. दादा जी की पोती इन्दु ने कहाँ तक शिक्षा प्राप्त की थी?
उत्तर: दादा जी की पोती इन्दु ने प्राइमरी स्कूल तक शिक्षा प्राप्त की थी।
प्रश्न 5. 'सूखी डाली' एकांकी में दादा जी ने अपने कुटुम्ब की तुलना किससे की है?
उत्तर: 'सूखी डाली' एकांकी में दादा जी ने अपने कुटुम्ब की तुलना वट के महान वृक्ष से की है।
प्रश्न 6. बेला ने अपने कमरे में से फर्नीचर बाहर क्यों निकाल दिया?
उत्तर: बेला ने अपने कमरे का फर्नीचर बाहर इसलिए निकाल दिया क्योंकि वह पुराना हो गया था और टूट-फूट भी गया था।
प्रश्न 7. दादा जी पुराने नौकरों के हक में क्यों थे?
उत्तर: दादा जी पुराने नौकरों के हक में इसलिए थे क्योंकि वे ईमानदार और विश्वसनीय होते हैं।
प्रश्न 8. बेला ने मिश्रानी को काम से क्यों हटा दिया?
उत्तर: बेला ने मिश्रानी को काम से इसलिए हटा दिया क्योंकि बेला के अनुसार उसे ढंग से काम करना नहीं आता था और उसे काम का सलीका भी नहीं था।
प्रश्न 9. एकांकी के अंत में बेला रुंधे कंठ से क्या कहती है?
उत्तर: एकांकी के अंत में बेला रुंधे कंठ से दादा जी को कहती है कि आप पेड़ से किसी डाली का टूट कर अलग होना पसंद नहीं करते, पर क्या आप यह चाहेंगे कि पेड़ से लगी-लगी वह डाल सूख कर मुरझा जाए।
तीन-चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. एकांकी के पहले दृश्य में इन्दु बिफरी हुई क्यों दिखाई देती है?
उत्तर: एकांकी के पहले दृश्य में इन्दु बिफरी हुई दिखाई देती है क्योंकि उसके अनुसार नई बहू अपने मायके और अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझती। उसने आते ही मिश्रानी को काम से हटा दिया क्योंकि नई बहू के अनुसार मिश्रानी को काम करना नहीं आता। इंदु ने जब उसे समझाया कि वह काम करना सीख जाएगी और हमें नौकरों से काम लेने की भी तमीज़ होनी चाहिए तो उसने इंदु को कह दिया कि वह तमीज़ तो केवल आप लोगों में ही है। इस प्रकार नई बहू से कहा-सुनी होने के कारण इंदु बिफरी हुई दिखाई देती है।
प्रश्न 2. दादा जी कर्मचंद की किस बात से चिंतित हो उठते हैं?
उत्तर: दादा जी कर्मचंद से परेश के घर से अलग होने की बात सुनकर चिंतित हो उठते हैं क्योंकि उनके अनुसार उनका परिवार बरगद के पेड़ के समान है। अगर एक बार पेड़ से कोई डाली टूट जाती है तो उसे कितना ही पानी क्यों न दिया जाए उसमें सरसता कभी नहीं आती और वे कभी नहीं चाहते कि उनके परिवार रूपी पेड़ से कोई भी डाली टूट कर अलग हो जाए या उनका परिवार किसी भी कीमत पर टूट जाए।
प्रश्न 3. कर्मचंद ने दादा जी को छोटी बहू बेला के विषय में क्या बताया?
उत्तर: कर्मचंद ने दादा जी को छोटी बहू बेला के विषय में बताते हुए कहा कि उनका विचार है कि छोटी बहू में दर्प की मात्रा ज़रूरत से कुछ ज़्यादा है। उन्होंने जो मलमल के थान और रज़ाई के अबरे ला कर दिए थे, वह सब ने रख लिए परंतु छोटी बहू को पसंद नहीं आए। शायद छोटी बहू अपने मायके के घराने को इस घराने से बड़ा समझती है और इस घर को घृणा की दृष्टि से देखती है।
प्रश्न 4. परेश ने दादा जी के पास जाकर अपनी पत्नी बेला के सम्बन्ध में क्या बताया?
उत्तर: परेश ने दादा जी के पास जाकर अपनी पत्नी बेला के सम्बन्ध में बताया कि बेला को कोई भी पसंद नहीं करता। सब उसकी निंदा करते हैं। परेश दादा जी से कहता है कि बेला के अनुसार सब उसका अपमान करते हैं, हँसी उड़ाते हैं और समय नष्ट करते हैं। वह ऐसा महसूस करती है जैसे कि परायों में आ गई हो। उसे यहाँ पर कोई भी अपना दिखाई नहीं देता।
प्रश्न 5. जब परेश ने दादा जी से कहा कि बेला अपनी गृहस्थी अलग बसाना चाहती है तो दादा जी ने परेश को क्या समझाया?
उत्तर: जब परेश ने दादा जी से कहा कि बेला अपनी अलग गृहस्थी बसाना चाहती है तो दादा जी ने कहा कि उनके जीते जी यह संभव नहीं है। उन्होंने सदा इस परिवार को एक महान वट वृक्ष के रूप में देखा है जिसे वह टूटते हुए नहीं देख सकते। उन्होंने परेश को यह विश्वास दिलाया कि वे घर में सभी को समझा देंगे। कोई भी बेला का अपमान नहीं करेगा, उसका समय नष्ट नहीं करेगा। उसे वही आदर सत्कार यहाँ पर भी मिलेगा जो उसे अपने घर में प्राप्त था। वह अपने आप को परायों में घिरा महसूस नहीं करेगी।
छह या सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. इन्दु को बेला की कौन-सी बात सबसे अधिक परेशान करती है? क्यों?
उत्तर: इंदु बेला की ननद है। बेला के घर में आने से पहले वह सबसे अधिक पढ़ी-लिखी समझी जाती थी। घर में उसकी खूब चलती थी। परंतु बेला उससे अधिक पढ़ी लिखी है और वह हर बात में अपने मायके की बात करती है। बेला ने घर में आते ही मिश्रानी को यह कह कर काम से हटा दिया कि उसे काम करना नहीं आता। इंदु जब उसे कहती है कि हमें नौकरों से भी काम लेने की तमीज़ होनी चाहिए तो बेला उसे यह कह देती है कि वह ढंग उसे नहीं आता । उसके मायके में तो ऐसे नौकर घड़ी भर भी नहीं टिकते। इस प्रकार बेला का बात-बात में अपने मायके की बात करना और हर बात में अपने मायके के घराने को अच्छा बताना और इस घर को घृणा की दृष्टि से देखना इंदु को सबसे अधिक परेशान करता है।
प्रश्न 2. दादा जी छोटी बहू के अलावा घर के सभी सदस्यों को बुलाकर क्या समझाते हैं?
उत्तर: दादा जी छोटी बहू के अलावा घर के सभी सदस्यों को बुलाकर समझाते हैं कि वह बड़े घर की पढ़ी-लिखी लड़की है। यदि उसका यहाँ पर मन नहीं लगा तो उसमें दोष उसका नहीं हमारा है। कोई भी व्यक्ति उम्र या दर्जे से बड़ा नहीं होता, बुद्धि से बड़ा होता है। छोटी बहू उम्र में न सही परंतु बुद्धि में हम सबसे बड़ी है। इसलिए हमें उसकी बुद्धि का लाभ उठाना चाहिए। उसे वही आदर सत्कार देना चाहिए जो उसे अपने घर में प्राप्त था। सभी उसका कहना मानें, उस से परामर्श लें और उसके काम को आपस में बाँट लें। उसे पढ़ने-लिखने का अधिक अवसर दें ताकि उसे यह अनुभव न हो कि वह किसी दूसरे घर में आ गई है। साथ ही दादा जी यह चेतावनी भी देते हैं कि यदि किसी ने छोटी बहू का निरादर किया तो उसका नाता दादा जी से हमेशा के लिए टूट जाएगा।
प्रश्न 3. एकांकी के अंतिम भाग में घर के सदस्यों के बदले हुए व्यवहार से बेला परेशान क्यों हो जाती है?
उत्तर: एकांकी के अंतिम भाग में घर के सदस्यों के बदले हुए व्यवहार से बेला परेशान हो जाती है क्योंकि उसे उनका ऐसा व्यवहार बहुत ही ज्यादा औपचारिक प्रतीत होता है। सब उसको आदर देने लगते हैं। उसकी सलाह माँगने लगते हैं। उसको देख कर सब चुप हो जाते हैं। उसे कोई काम नहीं करने देते। उसे इतना अधिक आदर सत्कार और आराम भी अच्छा नहीं लगता उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कि सभी उसके साथ जानबूझ कर ऐसा व्यवहार कर रहे हों।
प्रश्न 4. मँझली बहू के चरित्र की कौन-सी विशेषता इस एकांकी में सबसे अधिक दृष्टिगोचर होती है?
उत्तर: इस एकांकी में मँझली बहू हँसी ठिठोली करने वाली हँसमुख स्वभाव की स्त्री के रूप में दृष्टिगोचर होती है। वह सारा दिन छोटी-छोटी बातों पर हँसती मुस्कुराती रहती है। किसी के विचित्र व्यवहार पर हँसना और ठहाके लगाना उसके लिए सामान्य-सी बात है। परेश और बेला में हुई बहस को सुनकर वह इतना हँसती है कि बेकाबू हो जाती है। उसकी हँसी बेला को और भी खिझा देती है। इसीलिए दादा जी उसे विशेष रूप से यह समझाते हैं कि उसे अपनी हँसी उन लोगों तक ही सीमित रखनी चाहिए जो उसे सहन कर सकते हैं। घर के लोगों को तब तक हँसी का निशाना नहीं बनाना चाहिए जब तक वे पूर्णतया घर का अंग न बन जाएं।
प्रश्न 5. 'सूखी डाली' एकांकी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: 'सूखी डाली' एकांकी 'उपेंद्रनाथ अश्क' जी द्वारा रचित एक शिक्षाप्रद पारिवारिक एकांकी है। जिसमें अश्क जी ने एकांकी के विभिन्न पात्रों के माध्यम से संयुक्त परिवारों की एक झाँकी प्रस्तुत करते हुए हमें यह शिक्षा देने का प्रयत्न किया है कि हमें परिवार में अपने बुज़ुर्गों, माता-पिता आदि का आदर करना चाहिए। उनके प्रति श्रद्धा भाव रखना चाहिए। उनके सुझावों को खुशी से मानना चाहिए। कोई भी व्यक्ति उम्र से छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि बुद्धि व ज्ञान से होता है। छोटा हो या बड़ा सभी के गुणों का सम्मान करना चाहिए। स्वयं को सुशिक्षित या सुसंस्कृत मानकर घमंड में चूर नहीं रहना चाहिए अन्यथा घमंड में रहने वाला व्यक्ति परिवार के साथ रहते हुए भी सूखी डाली के समान जड़ बन कर रह जाता है। इस एकांकी में दादा जी के माध्यम से यह भी शिक्षा दी गई है कि नए और पुराने की टक्कर तथा घर में होने वाले संघर्ष को भी सूझबूझ से दूर किया जा सकता है। इस प्रकार लेखक ने घर के सभी सदस्यों को मिलजुल कर रहने की शिक्षा दी है।
पाठ - 19: देश के दुश्मन (जयनाथ नलिन)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. सुमित्रा के पुत्र का नाम बताइए।
उत्तर: सुमित्रा के पुत्र का नाम जयदेव है।
प्रश्न 2. वाघा बॉर्डर पर सरकारी अफ़सरों के मारे जाने की ख़बर सुमित्रा कहाँ सुनती है?
उत्तर: वाघा बॉर्डर पर सरकारी अफ़सरों के मारे जाने की ख़बर सुमित्रा माधोराम के घर रेडियो पर सुनती है।
प्रश्न 3. जयदेव वाघा बॉर्डर पर किस पद पर नियुक्त था?
उत्तर: जयदेव वाघा बॉर्डर पर डी०एस०पी० के पद पर नियुक्त था।
प्रश्न 4. जयदेव की पत्नी कौन थी?
उत्तर: जयदेव की पत्नी नीलम थी।
प्रश्न 5. वाघा बॉर्डर पर मारे जाने वाले दो सरकारी अफ़सर कौन थे?
उत्तर: एक हैड कॉन्सटेबल तथा दूसरा सब इंस्पेक्टर था।
प्रश्न 6. जयदेव ने तस्करों को मार कर उनसे कितने लाख का सोना छीना?
उत्तर: जयदेव ने तस्करों को मारकर उनसे पाँच लाख रुपए का सोना छीना।
प्रश्न 7. जयदेव को स्वागत - सभा में कितने रुपए इनाम में देने के लिए सोचा गया?
उत्तर: जयदेव को स्वागत - सभा में दस हजार रुपए इनाम में देने के लिए सोचा गया।
प्रश्न 8. मीना कौन थी?
उत्तर: मीना जयदेव की बहन थी।
प्रश्न 9. नीलम क्यों चाहती थी कि डी.सी. दोपहर के बाद जयदेव को मिलने आए?
उत्तर: जयदेव अभी - अभी घर आए थे और बहुत थके हुए थे। इसी कारण नीलम चाहती थी कि डी.सी. दोपहर के बाद जयदेव को मिलने आए।
प्रश्न 10. डी.सी. आकर सुमित्रा को क्या ख़ुशख़बरी देते हैं?
उत्तर: डी. सी. आकर सुमित्रा को ख़ुशख़बरी देते हैं कि जयदेव की वीरता और साहस के लिए उन्हें सम्मानित किया जाएगा और गवर्नर साहब की ओर से दस हजार रुपए का इनाम भी सभा में घोषित किया जाएगा।
प्रश्न 11. जयदेव इनाम में मिलने वाली राशि के विषय में क्या घोषणा करवाना चाहता है?
उत्तर: जयदेव इनाम में मिलने वाली राशि के विषय में यह घोषणा करवाना चाहता है कि इनाम राशि के आधे-आधे पैसे दोनों मृत पुलिस अफ़सरों की विधवा पत्नियों में बांट दिए जाएँ।
तीन-चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. सुमित्रा क्यों कहती है कि अब उसका हृदय इतना दुर्बल हो चुका है कि ज़रा-सी आशंका से काँप उठता है?
उत्तर: सुमित्रा ऐसा इसलिए कहती है क्योंकि उसने अपने पति के बलिदान को तो हृदय पर पत्थर रखकर सहन कर लिया था। अब उसकी हिम्मत टूट चुकी है, देह जर्जर हो चुकी है और जयदेव ही उसका एकमात्र सहारा है। अगर उसे भी कुछ हो गया तो वह जी न सकेगी।
प्रश्न 2. नीलम जयदेव से मान भरी मुद्रा में क्या कहती है?
उत्तर: नीलम जयदेव से मान भरी मुद्रा में कहती है – "अब बताइये, इतने दिन कहाँ लगाये ? यहाँ तो राह देखते - देखते आँखें पथरा गई, वहाँ जनाब को परवाह तक नहीं कि किसी के दिल पर क्या बीत रही है।"
प्रश्न 3. जयदेव को गुप्तचरों से क्या समाचार मिला?
उत्तर: जयदेव को गुप्तचरों से यह समाचार मिला कि रात के अंधेरे में पुलिस पिकिट से एक डेढ़ मील दक्षिण की तरफ़ से कुछ लोग बॉर्डर पार करने वाले हैं। ऐसा शक है कि वे सोना स्मगल करके ला रहे हैं।
प्रश्न 4. जयदेव ने अपनी छुट्टी कैंसल क्यों करा दी थी?
उत्तर: जयदेव को छुट्टी आने से दो - तीन घंटे पहले ही गुप्तचरों से यह सूचना मिली कि रात के अंधेरे में पुलिस पिकिट से एक डेढ़ मील दक्षिण की तरफ से कुछ लोग सोना स्मगल कर बॉर्डर पार करने वाले हैं। जयदेव इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था, इसी कारण उसने अपनी छुट्टी कैंसल करा दी।
प्रश्न 5. एकांकी में डी.सी. के किस संवाद से पता चलता है कि डी.सी. और जयदेव में घनिष्ठता थी?
उत्तर: जब डी. सी. जयदेव से मिलने उनके घर आते हैं, तब जयदेव उन्हें सर कहकर बुलाता है, तभी डी.सी. कहते हैं "सर बैठा होगा ऑफिस की कुर्सी में। खबरदार जो यहाँ सर वर कहा। मैं वही तुम्हारा बचपन का दोस्त और क्लासमेट हूँ, जिससे बिना हाथापाई किए तुम्हें रोटी हज़म नहीं होती थी।"
छह-सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. चाचा अपने बेटे बलुआ के विषय में क्या बताते हैं?
उत्तर: चाचा अपने बेटे बलुआ के विषय में बताते हैं कि वह भी बहुत लापरवाह है। वह भी दो- दो महीने में, यहाँ से 4-5 चिट्ठी जाने के बाद ही एक आध पत्र लिखता है और उल्टे हमें ही शिक्षा देता है कि आप तो यूँ ही दो - चार दिनों में घबरा जाते हैं। काम बहुत रहता है, समय ही नहीं मिलता और आजकल तो ड्यूटी बड़ी कड़ी है। दम मारने को टाइम नहीं।
प्रश्न 2. चाचा सुमित्रा को अख़बार में आई कौन सी ख़बर सुनाते हैं?
उत्तर: चाचा सुमित्रा को अख़बार में आई ख़बर पढ़कर सुनाते हैं कि जयदेव की वीरता और सूझबूझ की खूब प्रशंसा हुई है। जयदेव ने तस्करों से किस बहादुरी और चतुराई से मोर्चा लिया, किस तरह उनको मार भगाया और किस तरह उनके चार आदमियों को गोलियों का निशाना बनाया तथा पाँच लाख का सोना उनसे छीन लिया।
प्रश्न 3. जयदेव ने तस्करों को कैसे पकड़ा?
उत्तर: जब जयदेव को गुप्तचरों से सोना स्मगल होने की ख़बर मिली तो उसने मौका हाथ से नहीं निकलने दिया और अपनी छुट्टी कैंसल करवा ली। जयदेव ने इन बदमाशों को पकड़ने का पक्का इरादा किया। आधी रात के बाद जब तस्कर उनकी चौकी से दो मील दूर एक ख़तरनाक घने ढाक के ऊबड़ खाबड़ रास्ते से बॉर्डर पार करने लगे तभी जयदेव और उसके साथियों ने उन्हें चैलेंज किया, जिसके बदले उन लोगों ने गोलियाँ चला दी। जयदेव ने उनकी चुनौती को स्वीकार कर अपनी दो तीन जीपों से उनका पीछा किया और अपने अचूक निशाने से उनकी जीप का पहिया उड़ा दिया। जिससे जीप लुढ़ककर एक खड्डे में जा गिरी। जयदेव और उसके अफ़सरों ने स्मगलरों की घेराबंदी की और उन्हें पकड़ लिया।