10वीं कक्षा - हिंदी कविताएँ प्रश्न-उत्तर (पाठ 1 - 6)
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पाठ - 01: तुलसीदास दोहावली
प्रश्न 1. तुलसीदास जी के अनुसार राम जी के निर्मल यश का गान करने से कौन-से चार फल मिलते हैं?
उत्तर: भगवान राम जी के निर्मल यश का गान करने से - धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष चार फल प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 2. मन के भीतर और बाहर उजाला करने के लिए तुलसी कौन-सा दीपक हृदय में रखने की बात करते हैं?
उत्तर: मन के भीतर और बाहर उजाला करने के लिए तुलसी राम-नाम रूपी मणियों का दीपक हृदय में रखने की बात करते हैं।
प्रश्न 3. संत किसकी भांति नीर-क्षीर विवेक करते हैं?
उत्तर: संत हंस की भांति नीर-क्षीर विवेक करते हैं।
प्रश्न 4. तुलसीदास के अनुसार भवसागर को कैसे पार किया जा सकता है?
उत्तर: भगवान राम जी से सच्चा प्रेम करके भवसागर को पार किया जा सकता है।
प्रश्न 5. जो व्यक्ति दूसरों के सुख और समृद्धि को देखकर ईर्ष्या से जलता है, उसे भाग्य में क्या मिलता है?
उत्तर: जो व्यक्ति दूसरों के सुख और समृद्धि को देखकर ईर्ष्या से जलता है, उसके भाग्य से भलाई और खुशहाली भाग जाती है।
प्रश्न 6. रामभक्ति के लिए गोस्वामी तुलसीदास किसकी आवश्यकता बतलाते हैं?
उत्तर: रामभक्ति के लिए गोस्वामी तुलसीदास सच्चे और अटूट विश्वास की आवश्यकता बतलाते हैं।
पाठ - 02: मीराबाई (पदावली)
प्रश्न 1. श्री कृष्ण ने कौन-सा पर्वत धारण किया था?
उत्तर: श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत धारण किया था।
प्रश्न 2. मीरा किसे अपने नयनों में बसाना चाहती है?
उत्तर: मीरा श्री कृष्ण को अपने नयनों में बसाना चाहती है।
प्रश्न 3. श्रीकृष्ण ने किस प्रकार का मुकुट और कुंडल धारण किए हैं?
उत्तर: श्रीकृष्ण ने मोर के पंखों का मुकुट और मकर की आकृति के कुंडल धारण किए हैं।
प्रश्न 4. मीरा किसे देखकर प्रसन्न हुई और किसे देखकर दु:खी हुई?
उत्तर: मीरा भक्तों को देखकर प्रसन्न हुई और सांसारिक मोह-माया में फँसे हुए लोगों को देखकर दु:खी हुई।
प्रश्न 5. संतों की संगति में रहकर मीरा ने क्या छोड़ दिया?
उत्तर: संतों की संगति में रहकर मीरा ने कुल की मर्यादा तथा लोक लाज को छोड़ दिया।
प्रश्न 6. मीरा अपने आँसुओं के जल से किस बेल को सींच रही थी?
उत्तर: मीरा अपने आँसुओं के जल से श्री कृष्ण के प्रेम रूपी बेल को सींच रही थी।
प्रश्न 7. पदावली के दूसरे पद में मीराबाई गिरिधर से क्या चाहती है?
उत्तर: पदावली के दूसरे पद में मीराबाई गिरिधर से अपना उद्धार चाहती है।
पाठ - 03: नीति के दोहे
प्रश्न 1. रहीम जी के अनुसार सच्चे मित्र की क्या पहचान है?
उत्तर: रहीम जी के अनुसार सच्चा मित्र वही होता है जो मुसीबत के समय हमारा साथ देता है।
प्रश्न 2. ज्ञानी व्यक्ति संपत्ति का संचय किस लिए करते हैं?
उत्तर: ज्ञानी व्यक्ति संपत्ति का संचय दूसरों की भलाई के लिए करते हैं।
प्रश्न 3. बिहारी जी के अनुसार किसका साथ शोभा देता है?
उत्तर: बिहारी जी के अनुसार एक जैसी प्रकृति व स्वभाव वाले लोगों का साथ शोभा देता है।
प्रश्न 4. बिहारी जी ने मानव को आशावादी होने का क्या संदेश दिया है?
उत्तर: बिहारी जी ने भँवरे के माध्यम से मनुष्य को निराश न हो कर आने वाले अच्छे दिनों के लिए आशावादी होने का संदेश दिया है।
प्रश्न 5. छल और कपट का व्यवहार बार-बार नहीं चल सकता - इसके लिए वृन्द जी ने क्या उदाहरण दिया है?
उत्तर: छल और कपट का व्यवहार बार-बार नहीं चल सकता इसके लिए वृन्द जी ने काठ अर्थात् लकड़ी की हाँडी की उदाहरण दी है कि जिस प्रकार लकड़ी की हाँडी को बार-बार आग पर नहीं चढ़ाया जा सकता उसी प्रकार छल कपट का व्यवहार भी बार-बार नहीं चल सकता।
प्रश्न 6. निरंतर अभ्यास से व्यक्ति कैसे योग्य बन जाता है? वृंद जी ने इसके लिए क्या उदाहरण दिया है?
उत्तर: निरंतर अभ्यास से व्यक्ति योग्य बन जाता है इसके लिए वृंद जी ने पत्थर और रस्सी की उदाहरण देते हुए कहा है कि जिस प्रकार बार-बार रस्सी घिसने से पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं, उसी प्रकार बार-बार अभ्यास करते रहने से एक मूर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन जाता है।
प्रश्न 7. शत्रु को कमजोर या छोटा क्यों नहीं समझना चाहिए?
उत्तर: शत्रु को कमजोर या छोटा इसलिए नहीं समझना चाहिए क्योंकि कई बार छोटा-सा शत्रु भी बहुत बड़ा नुक्सान कर देता है, ठीक वैसे ही जैसे एक छोटा-सा अंगारा तिनकों के बहुत बड़े समूह को जला देता है।
पाठ - 04: हम राज्य लिए मरते हैं
प्रश्न 1. प्रस्तुत गीत में उर्मिला किसकी प्रशंसा कर रही है?
उत्तर: प्रस्तुत गीत में उर्मिला किसानों की प्रशंसा कर रही है।
प्रश्न 2. किसान संसार को समृद्ध कैसे बनाते हैं?
उत्तर: किसान अन्न पैदा करके संसार को समृद्ध बनाते हैं।
प्रश्न 3. किसान किस प्रकार परिश्रम रूपी समुद्र को धीरज से तैर कर पार करते हैं?
उत्तर: किसान सहनशील होने के कारण अपने परिश्रम और धैर्य से परिश्रम रूपी समुद्र को तैर कर पार करते हैं।
प्रश्न 4. किसानों का अपने ऊपर गर्व करना कैसे उचित है?
उत्तर: किसानों का अपने ऊपर गर्व करना इसलिए उचित है क्योंकि वे समस्त संसार के अन्नदाता होते हैं।
प्रश्न 5. किसान व्यर्थ के वाद-विवाद को छोड़कर किस धर्म का पालन करते हैं?
उत्तर: किसान व्यर्थ के वाद-विवाद को छोड़कर धर्म की मूल बात का पालन करते हैं।
प्रश्न 6. "हम राज्य लिए मरते हैं" में उर्मिला राज्य के कारण होने वाली किस कलह की बात कहना चाहती है?
उत्तर: "हम राज्य लिए मरते हैं" में उर्मिला राज्य के लिए श्री राम को बनवास दिए जाने तथा भरत को राज्य देने से उत्पन्न कलह की बात कहना चाहती है।
पाठ - 05: गाता खग
प्रश्न 1. पक्षी प्रातः उठकर क्या गाता है?
उत्तर: पक्षी प्रातः उठकर जग के प्राणियों के सुंदर, सुखमय और समृद्ध जीवन की कामना के गीत गाता है।
प्रश्न 2. तारों की पंक्तियों की आँखों का अनुभव क्या है?
उत्तर: तारों की पंक्तियों की आँखों का अनुभव देखकर लगता है कि जैसे वे कह रही हों कि सारे जग का जीवन दु:ख, करुणा और विषमता से भरा हुआ है।
प्रश्न 3. फूल हमें क्या संदेश देते हैं?
उत्तर: फूल हमें सदैव मुस्कुराते रहने का संदेश देते हैं।
प्रश्न 4. लहरें किस उमंग में आगे बढ़ती जाती हैं?
उत्तर: लहरें इस उमंग में आगे बढ़ती जाती हैं कि उन्हें कभी न कभी तो अपना लक्ष्य (किनारा) प्राप्त हो ही जाएगा।
प्रश्न 5. बुलबुला विलीन होकर क्या पा जाता है?
उत्तर: बुलबुला विलीन होकर अपने जीवन का अन्तिम आशय पा जाता है।
पाठ - 06: जड़ की मुस्कान
प्रश्न 1. एक दिन तने ने जड़ को क्या कहा?
उत्तर: एक दिन तने ने जड़ को कहा कि वह तो निर्जीव है और सदा जीवन से डरी रहती है।
प्रश्न 2. जड़ का इतिहास क्या है?
उत्तर: जड़ का इतिहास यह है कि वह सदा ज़मीन के अंदर मुँह गड़ा कर पड़ी रहती है और कभी भी मिट्टी से बाहर नहीं निकलती।
प्रश्न 3. डाली तने को हीन क्यों समझती है?
उत्तर: डाली तने को हीन इसलिए समझती है क्योंकि उसे जहाँ बिठा दिया जाता है, वह वहीं बैठा रहता है। कभी भी गतिशील नहीं होता जबकि डाली लहराती रहती है।
प्रश्न 4. पत्तियाँ डाल की किस कमी की ओर संकेत करती हैं?
उत्तर: डाल पत्तियों की तरह हर-हर स्वर नहीं करती। वह कभी भी एक शब्द नहीं बोलती।
प्रश्न 5. फूलों ने पत्तियों की चंचलता का आधार क्या बताया?
उत्तर: फूलों ने पत्तियों की चंचलता का आधार डालियों को बताया।
प्रश्न 6. सबकी बातें सुनकर जड़ क्यों मुस्कराई?
उत्तर: सबकी बातें सुनकर जड़ इसलिए मुस्कराई क्योंकि उसे पता है कि यदि वह न होती तो तना, डाल, पत्तियां और फूल भी न होते। इन सब का अस्तित्व जड़ के कारण ही है।