10वीं कक्षा - हिंदी प्रश्न-उत्तर (पाठ 7 - 11)
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पाठ - 07: ममता (कहानी)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. ममता कौन थी?
उत्तर: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की पुत्री थी।
प्रश्न 2. मंत्री चूड़ामणि को किस की चिंता थी?
उत्तर: मंत्री चूड़ामणि को अपनी जवान विधवा बेटी ममता के भविष्य तथा अपने दुर्ग की चिंता थी।
प्रश्न 3. मंत्री चूड़ामणि ने अपनी विधवा पुत्री ममता को उपहार में क्या देना चाहा?
उत्तर: मंत्री चूड़ामणि ने अपनी विधवा पुत्री ममता को सोने-चाँदी के आभूषण उपहार में देने चाहे।
प्रश्न 4. डोलियों में छिपकर दुर्ग के अंदर कौन आए?
उत्तर: स्त्री-वेश में डोलियों में छिपकर दुर्ग के अन्दर शेरशाह के सिपाही आए।
प्रश्न 5. ममता रोहतास दुर्ग छोड़ कर कहाँ रहने लगी?
उत्तर: अपने पिता चूड़ामणि की मृत्यु के बाद ममता दुर्ग छोड़कर काशी के निकट बौद्ध विहार के खंडहरों में झोंपड़ी बनाकर रहने लगी।
प्रश्न 6. ममता से झोंपड़ी में किसने आश्रय माँगा?
उत्तर: ममता से झोंपड़ी में सातों देशों के नरेश हुमायूँ ने आश्रय माँगा।
प्रश्न 7. ममता पथिक को झोंपड़ी में स्थान देकर स्वयं कहाँ चली गई?
उत्तर: ममता पथिक को झोंपड़ी में स्थान देकर स्वयं खंडहरों में रात बिताने के लिए चली गई।
प्रश्न 8. चौसा युद्ध किन-किन के मध्य हुआ?
उत्तर: चौसा युद्ध हुमायूँ और शेरशाह सूरी के मध्य हुआ।
प्रश्न 9. विश्राम के बाद जाते हुए पथिक ने मिरजा को क्या आदेश दिया?
उत्तर: विश्राम के बाद जाते हुए पथिक ने मिरजा को यह आदेश दिया- "मिरजा! उस स्त्री को मैं कुछ भी न दे सका। उसका घर बनवा देना, क्योंकि विपत्ति में मैंने यहाँ आश्रय पाया था। यह स्थान भूलना मत।"
प्रश्न 10. ममता की जीर्ण-कंकाल अवस्था में उसकी सेवा कौन कर रहीं थीं?
उत्तर: ममता की जीर्ण-कंकाल अवस्था में उसकी सेवा गाँव की स्त्रियाँ कर रही थीं। जिनके सुख-दुःख में ममता जीवन भर सहभागिनी रही।
तीन या चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. ब्राह्मण चूड़ामणि कैसे मारा गया?
उत्तर: ब्राह्मण चूड़ामणि रोहतास दुर्ग का मंत्री था। उसे अपनी विधवा बेटी ममता के भविष्य की चिंता रहती थी। जिसके कारण उसने म्लेच्छों से रिश्वत स्वीकार कर ली। दूसरे दिन डोलियों में भरकर स्त्री-वेश में शेरशाह सूरी के सिपाही रोहतास दुर्ग में प्रवेश कर गए। चूड़ामणि ने जब डोलियों का आवरण खुलवाना चाहा तो पठानों ने इसे महिलाओं का अपमान कहा। तभी वहाँ पर तलवारें खिंच गई और चूड़ामणि मारा गया।
प्रश्न 2. ममता ने झोंपड़ी में आए व्यक्ति की सहायता किस प्रकार की?
उत्तर: एक रात जब ममता पूजा पाठ कर रही थी तब उसे एक भीषण आकृति वाला व्यक्ति अपने द्वार पर खड़ा दिखाई दिया, जो उससे आश्रय माँग रहा था। जब ममता को पता चला कि वह एक मुग़ल है तो वह उसकी मदद नहीं करना चाहती थी परंतु उसके अंदर 'अतिथि देवो भव' की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। इसलिए अतिथि की सेवा को अपना धर्म समझकर उसने उस मुग़ल को अपनी झोपड़ी में रात बिताने के लिए स्थान दे दिया और स्वयं खंडहरों में जाकर रात बिताई।
प्रश्न 3. ममता ने अपनी झोंपड़ी के द्वार पर आए अश्वारोही को बुलाकर क्या कहा?
उत्तर: ममता ने अपनी झोपड़ी के द्वार पर आए अश्वारोही को बुलाकर कहा कि वह नहीं जानती कि वह शहंशाह था या साधारण मुग़ल पर एक दिन इसी झोपड़ी में वह ठहरा था। ममता ने सुना था कि वह उसका घर बनवाने की आज्ञा दे गया था। वह आजीवन अपनी झोपड़ी खुदवाने के डर से भयभीत रही थी। परंतु आज वह अपने चिर विश्राम गृह में जा रही है, इसलिए अब तुम इसका मकान बनवाओ या महल, उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
प्रश्न 4. हुमायूँ द्वारा दिए गए आदेश का पालन कितने वर्षों बाद तथा किस रूप में हुआ?
उत्तर: हुमायूँ द्वारा दिए गए आदेश का पालन 47 वर्षों के बाद हुआ। हुमायूँ के बेटे अकबर ने अपने सैनिकों की सहायता से उस स्थान को ढूँढा जहाँ पर उसके पिता ने एक दिन के लिए विश्राम किया था। फिर वहाँ पर एक अष्टकोण मंदिर बनवाया गया। परंतु वहाँ पर ममता का कोई नाम नहीं था।
प्रश्न 5. मंदिर में लगाए शिलालेख पर क्या लिखा गया?
उत्तर: अकबर ने ममता की झोपड़ी के स्थान पर एक अष्टकोण मंदिर बनवाया और उस पर एक शिलालेख लगाया गया। जिस पर लिखा था, ‘सातों देशों के नरेश हुमायूँ ने एक दिन यहाँ विश्राम किया था। उनके पुत्र अकबर ने उसकी स्मृति में यह गगनचुंबी मंदिर बनवाया।‘ शिलालेख पर इतना सब लिखा गया। परंतु हुमायूँ को आश्रय देने वाली ममता का कहीं कोई नाम नहीं था।
छह या सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. ममता का चरित्र चित्रण कीजिए?
उत्तर: ममता इस कहानी की प्रमुख पात्रा है। सारी कहानी उसी के इर्द-गिर्द घूमती है। उसी के नाम पर इस कहानी का नामकरण 'ममता' किया गया है। वह अत्यंत सुंदर है। वह विधवा है। उसमें भारतीय नारी के सभी गुण मौजूद हैं। वह रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की पुत्री है। ब्राह्मण होने के कारण उसके मन में धन के प्रति कोई लालच नहीं है। वह राष्ट्र प्रेम की भावना से ओतप्रोत है। अपने पिता द्वारा ली गई रिश्वत को वह लौटा देने का आग्रह करती है। वह त्याग करना और कष्ट सहना जानती है। यह जानते हुए भी कि उसके पिता की हत्या यवनों के हाथों हुई है, वह एक मुगल को आश्रय देती है क्योंकि उसके मन में 'अतिथि देवो भव' की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। वह अपने द्वारा किए गए उपकार का बदला भी नहीं चाहती इसीलिए मुगल के द्वारा उसका घर बनवाने की बात से वह डर जाती है। वह आजीवन सभी के सुख-दु:ख की सहभागिनी रही। इसीलिए उसके अंतिम समय में गाँव की स्त्रियाँ उसकी सेवा के लिए उसको घेर कर बैठी थीं। अतः हम कह सकते हैं कि ममता एक देशभक्त, स्वाभिमानी, परोपकारी, अतिथि देवो भव की भावना से परिपूर्ण एक कर्तव्यनिष्ठ नारी है।
प्रश्न 2. 'ममता' कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: 'ममता' कहानी 'जयशंकर प्रसाद जी द्वारा रचित एक ऐतिहासिक कहानी है। इस कहानी में लेखक ने ममता के माध्यम से एक आदर्श, कर्तव्यनिष्ठ, त्यागी व तपस्वी जीवन जीने जैसे गुणों को अपनाने की शिक्षा दी है। लेखक के अनुसार इतिहास बनाने में केवल राजाओं का ही हाथ नहीं होता बल्कि एक आम आदमी का भी हाथ होता है। लेखक ने एक विधवा ब्राह्मणी ममता के माध्यम से एक ओर तो हमें रिश्वत न लेने की शिक्षा दी है और साथ ही 'अतिथि देवो भव' की भावना को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया है। इस प्रकार इस कहानी से हमें भ्रष्टाचार का विरोध करना, पथिक को आश्रय देना, परोपकार का बदला न चाहना आदि शिक्षाएँ प्राप्त होती हैं।
पाठ - 08: अशिक्षित का हृदय (कहानी)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. बूढ़े मनोहर सिंह का नीम का पेड़ किस के पास गिरवी था?
उत्तर: बूढ़े मनोहर सिंह का नीम का पेड़ ठाकुर शिवपाल सिंह के पास गिरवी था।
प्रश्न 2. ठाकुर शिवपाल सिंह रुपए न लौटाए जाने पर किस बात की धमकी देता है?
उत्तर: ठाकुर शिवपाल सिंह रुपए न लौटाए जाने पर नीम का पेड़ कटवा देने की धमकी देता है।
प्रश्न 3. मनोहर सिंह ने रुपए लौटाने की मोहलत कब तक की मांगी थी?
उत्तर: मनोहर सिंह ने रुपए लौटाने की मोहलत एक सप्ताह की मांगी थी।
प्रश्न 4. नीम का वृक्ष किस के हाथ का लगाया हुआ था?
उत्तर: नीम का वृक्ष बूढ़े मनोहर सिंह के पिता जी के हाथ का लगाया हुआ था।
प्रश्न 5. तेजा सिंह कौन था?
उत्तर: तेजा सिंह गाँव के एक प्रतिष्ठित किसान का बेटा था। उसकी आयु 15-16 वर्ष की थी।
प्रश्न 6. ठाकुर शिवपाल सिंह का कर्ज़ अदा हो जाने के बाद मनोहर सिंह ने अपने नीम के पेड़ के विषय में क्या निर्णय लिया?
उत्तर: ठाकुर शिवपाल सिंह का कर्ज़ अदा हो जाने के बाद मनोहर सिंह ने सभी गाँव वालों के सामने अपना नीम का पेड़ बालक तेजा सिंह के नाम कर दिया।
तीन या चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. मनोहर सिंह ने अपने नीम के पेड़ को गिरवी क्यों रखा?
उत्तर: एक वर्ष पूर्व मनोहर सिंह को खेती कराने की सनक सवार हुई थी। उसने ठाकुर शिवपाल सिंह की कुछ भूमि लगान पर लेकर खेती कराई थी। परंतु दुर्भाग्य से उस साल वर्षा न हुई, जिसके कारण कुछ भी पैदावार न हुई। ठाकुर शिवपाल सिंह को लगान न पहुँचा। तब ठाकुर शिवपाल सिंह ने मनोहर सिंह का नीम का पेड़ जो उसके पिता के हाथ का लगाया हुआ था, गिरवी रख लिया।
प्रश्न 2. ठाकुर शिवपाल सिंह नीम के पेड़ पर अपना अधिकार क्यों जताते हैं?
उत्तर: मनोहर सिंह ने डेढ़ वर्ष पूर्व ठाकुर शिवपाल सिंह से खेती करने के लिए रुपए उधार लिए थे। जिसे वह हाथ तंग होने के कारण चुका नहीं पाया। यहाँ तक कि वह उसका ब्याज भी नहीं दे पाया। तब ठाकुर ने रुपयों के स्थान पर मनोहर सिंह का नीम का पेड़ अपने पास गिरवी रख लिया। एक सप्ताह की मोहलत के पश्चात भी जब ठाकुर को रुपए नहीं मिले तब वह नीम के पेड़ पर अपना अधिकार जताते हैं।
प्रश्न 3. मनोहर सिंह ठाकुर शिवपाल सिंह से अपने नीम के वृक्ष के लिए क्या आश्वासन चाहता था?
उत्तर: मनोहर सिंह जब ठाकुर शिवपाल सिंह का कर्ज़ न चुका पाया तो ठाकुर ने उसका नीम का पेड़ अपने पास गिरवी रख लिया। मनोहर सिंह ने उसे कहा कि अब आपके रुपए का कोई जोखिम नहीं है। क्योंकि यह पेड़ कम से कम 25-30 रुपए का तो अवश्य होगा। यदि वह उधार न चुका पाया तो वह पेड़ उनका हो जाएगा। परंतु वह ठाकुर शिवपाल सिंह से यह आश्वासन चाहता था कि कुछ भी हो जाए परंतु वे उस पेड़ को कटवाएंगे नहीं।
प्रश्न 4. नीम के वृक्ष के साथ मनोहर सिंह का इतना लगाव क्यों था?
उत्तर: नीम का वृक्ष उसके पिता के हाथ का लगाया हुआ था। इसके साथ उसका बचपन बीता था। वह वृक्ष उसे और उसके परिवार को दातुन और छाया देता रहा था, जिससे उसे सुख मिलता था। वह पेड़ उसे मित्र के समान प्रिय था और उसके पिता के हाथ की निशानी थी इसीलिए उस पेड़ से उसे बहुत लगाव था।
प्रश्न 5. मनोहर सिंह ने अपना पेड़ बचाने के लिए क्या उपाय किया?
उत्तर: मनोहर सिंह ने अपना पेड़ बचाने के लिए हर संभव उपाय किया। उसने बहुत दौड़-धूप की और दो-चार आदमियों से कर्ज़ भी माँगा परंतु किसी ने उसे रुपए न दिए। फिर उसने निश्चय किया कि उसके जीते जी कोई पेड़ न काट सकेगा। उसने अपनी तलवार निकालकर साफ़ कर ली और हर समय पेड़ के नीचे पड़ा रहने लगा। एक दिन जब ठाकुर के आदमी पेड़ काटने के लिए आए तो वह तलवार निकालकर डट कर खड़ा हो गया और उन्हें डरा धमका कर वापस भेज दिया।
प्रश्न 6. मनोहर सिंह की किस बात से तेजा सिंह प्रभावित हुआ?
उत्तर: तेजा सिंह मनोहर सिंह को चाचा कहकर बुलाता था। एक दिन मनोहर सिंह को अकेला बड़बड़ाता हुआ देखकर उसका कारण पूछता है। मनोहर सिंह उसे अपना सारा कष्ट और आपबीती बताता है। मनोहर सिंह उसे कहता है कि वह इस पेड़ के लिए मर मिटने को भी तैयार है तो एक पेड़ के प्रति उसका इतना लगाव देखकर तेजा सिंह बहुत प्रभावित होता है।
प्रश्न 7. तेजा सिंह ने मनोहर सिंह की सहायता किस प्रकार की?
उत्तर: तेजा सिंह मनोहर सिंह का एक पेड़ के प्रति लगाव देखकर बहुत प्रभावित होता है। वह मनोहर सिंह की पेड़ बचाने में सहायता करना चाहता है। इसलिए वह अपने घर से 25 रुपए लेकर आता है। परंतु शीघ्र ही पता चलता है कि वह पैसे उसने चुराए हैं। तेजा के पिता उससे वे रुपए ले लेते हैं। तब तेजा सिंह मनोहर सिंह का कर्ज़ चुकाने के लिए अपनी नानी द्वारा दी गई सोने की अंगूठी उसे दे देता है, जिस पर उसके पिता का कोई अधिकार नहीं था। तब तेजा के पिता अंगूठी के स्थान पर 25 रुपए देकर ठाकुर का कर्ज़ चुका देते हैं। इस प्रकार तेजा सिंह मनोहर सिंह की पेड़ बचाने में सहायता करता है।
छह या सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. मनोहर सिंह का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर: मनोहर सिंह ‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी का प्रमुख पात्र है। सारी कहानी उसी के इर्द-गिर्द घूमती है। उसकी आयु लगभग 55 वर्ष है। उसने अपनी जवानी फौज में नौकरी करते हुए बिताई। अब वह संसार में अकेला है। परिवार का कोई सगा-संबंधी नहीं। गाँव में 1-2 दूर के संबंधी है जिन से भोजन बनवा कर वह अपनी जीवन की गाड़ी खींच रहा था। एक बार वह ठाकुर शिवपाल सिंह से खेती के लिए कर्ज़ लेता है। जिसे वह चुका नहीं पाता तो ठाकुर उसका नीम का पेड़ अपने पास गिरवी रख लेता है। मनोहर सिंह ठाकुर को पेड़ तो दे देता है परंतु उससे केवल एक आश्वासन चाहता है कि वह उस पेड़ को काटे नहीं। वह उस नीम के पेड़ से अपने भाई जैसे प्रेम करता है क्योंकि वह उसके पिता के हाथ का लगाया हुआ था। उस पेड़ के लिए वह मर मिटने को भी तैयार हो जाता है। जब उसे पता चलता है कि तेजा सिंह उसके पेड़ को बचाने के लिए घर से पैसे चुरा कर लाया है, तब वह उसे भी ऐसा करने से मना करता है और उसके पैसे वापस कर देता है। तेजा सिंह द्वारा पेड़ बचाने में सहायता करने पर वह अपना पेड़ उसी के नाम कर देता है। इस प्रकार वह हमारे सामने प्रकृति से प्रेम करने वाला, अपने पिता की धरोहर का सम्मान करने वाले, स्वाभिमानी व परोपकार को मानने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत हुआ है।
प्रश्न 2. तेजा सिंह का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर: तेजा सिंह इस कहानी का दूसरा प्रमुख पात्र है। वह पन्द्रह-सोलह साल का एक किशोर है। गाँव के एक प्रतिष्ठित किसान का बेटा है। वह बहुत ही समझदार व भावुक है। वह मनोहर सिंह को चाचा कहकर बुलाता है। जब वह मनोहर सिंह का पेड़ के प्रति प्रेम देखता है तो उससे बहुत प्रभावित होता है। वह मनोहर सिंह के पेड़ की रक्षा के लिए अपने घर से 25 रुपए चुरा कर लाता है। पिता द्वारा पैसे वापस ले लिए जाने पर वह अपनी नानी द्वारा दी गई सोने की अंगूठी पेड़ को बचाने के लिए दे देता है। तेजा सिंह का पेड़ के प्रति प्रेम देखकर मनोहर सिंह अपना नीम का पेड़ उसी को दे देता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि तेजा सिंह एक साहसी, समझदार, भावुक व प्रकृति प्रेमी किशोर के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत हुआ है।
प्रश्न 3. 'अशिक्षित का हृदय' कहानी का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: 'अशिक्षित का हृदय' कहानी विशंभर नाथ शर्मा 'कौशिक' जी द्वारा रचित एक उद्देश्य पूर्ण कहानी है। इस कहानी में अशिक्षित मनोहर सिंह के निश्चल और स्नेहपूर्ण हृदय का चित्रण किया गया है। व्यक्ति का व्यक्ति के प्रति प्रेम तो अक्सर सुनने को मिलता है परंतु किसी का एक पेड़ के प्रति प्रेम कम ही देखने को मिलता है जो इस कहानी में दिखाया गया है। इसी के साथ इस कहानी में कर्ज़ लेने के नुकसान के बारे में भी बताया है। लेखक ने यहाँ पर यह भी बताने का प्रयत्न किया है कि जिस व्यक्ति के पास धन दौलत नहीं होती उसके मित्र भी उससे दूर भागते हैं। मनोहर सिंह और तेजा सिंह के माध्यम से लेखक ने लोगों को प्रकृति से प्रेम करने और मानवीय भावनाओं का सम्मान करने के लिए भी प्रेरित किया है।
पाठ - 09: दो कलाकार (मन्नू भंडारी)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. छात्रावास में रहने वाली दो सहेलियों के नाम क्या थे?
उत्तर: छात्रावास में रहने वाली दो सहेलियों के नाम अरुणा और चित्रा थे।
प्रश्न 2. चित्रा कहानी के आरम्भ में अरुणा को क्यों जगाती है?
उत्तर: चित्रा कहानी के आरम्भ में अरुणा को अपने द्वारा बनाया हुआ चित्र दिखाने के लिए जगाती है।
प्रश्न 3. अरुणा चित्रा के चित्रों के बारे में क्या कहती है?
उत्तर: अरुणा चित्रा के चित्रों के बारे में कहती है कि "कागज़ पर इन बेजान चित्रों को बनाने की बजाय दो-चार की ज़िन्दगी क्यों नहीं बना देती।"
प्रश्न 4. अरुणा छात्रावास में रात को देर से लौटती है तो शीला उसके बारे में क्या कहती है?
उत्तर: अरुणा छात्रावास में रात को देर से लौटती है तो शीला उसके बारे में कहती है कि वह बहुत गुणी है। वह दूसरों के बारे में सोचने वाली समाज सेविका है।
प्रश्न 5. चित्रा के पिता जी ने पत्र में क्या लिखा था?
उत्तर: चित्रा के पिता जी ने पत्र में लिखा था कि जैसे ही उसकी पढ़ाई खत्म हो जाएगी, वह विदेश जा सकती है।
प्रश्न 6. अरुणा बाढ़ पीड़ितों की सहायता करके स्वयंसेवकों के दल के साथ कितने दिनों बाद लौटीं?
उत्तर: अरुणा बाढ़ पीड़ितों की सहायता करके स्वयंसेवकों के दल के साथ 15 दिनों बाद लौटीं।
प्रश्न 7. विदेश में चित्रा के किस चित्र ने धूम मचाई थी?
उत्तर: विदेश में चित्रा के भिखमंगी और दो अनाथ बच्चों के चित्र ने धूम मचाई थी।
तीन या चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. अरुणा के समाज सेवा के कार्यों के बारे में लिखिए।
उत्तर: अरुणा एक सच्ची समाज सेविका है। वह छात्रावास में रहते हुए सदा समाज सेवा के कार्यों में जुटी रहती है। वह वहाँ रहकर चपरासियों, दाइयों आदि के बच्चों को मुफ्त पढ़ाती है। बाढ़ पीड़ितों की सेवा के लिए बहुत दिन छात्रावास से बाहर रहती है। फुलिया के बीमार बच्चे की सेवा में दिन रात एक कर देती है। भिखारिन के मरने के बाद वह उसके दोनों बच्चों का पालन पोषण करती है। इस तरह वह सदा समाज सेवा के कार्यों में लगी रहती है।
प्रश्न 2. मरी हुई भिखारिन और उसके दोनों बच्चों को उसके सूखे शरीर से चिपक कर रोते देख चित्रा ने क्या किया?
उत्तर: चित्रा जब वापस लौट रही थी तो उसने देखा कि भिखारिन मर चुकी है और उसके दोनों बच्चे उसके सूखे शरीर से लिपट कर रो रहे हैं। चित्रा के संवेदनशील मन से रहा नहीं गया। उसके अंदर का कलाकार जाग उठा। वह वहीं रुक गई और उस दृश्य को उसने कागज़ पर उतार कर एक चित्र का रूप दे दिया।
प्रश्न 3. चित्रा की हॉस्टल से विदाई के समय अरुणा क्यों नहीं पहुँच सकी?
उत्तर: जब चित्रा ने आकर अरुणा को मरी हुई भिखारिन और उसके रोते हुए बच्चों के बारे में बताया तो अरुणा यह सुनकर स्वयं को रोक नहीं पाई और वह उसी समय उस भिखारिन के बच्चों के पास पहुँच गयी। उन बच्चों को संभालने में व्यस्त होने के कारण ही वह चित्रा की विदाई के समय वहाँ पर पहुँच नहीं पाई।
प्रश्न 4. प्रदर्शनी में अरुणा के साथ कौन से बच्चे थे?
उत्तर: प्रदर्शनी में अरुणा के साथ जो दो बच्चे थे, वे उसी मरी हुई भिखारिन के बच्चे थे जो अपनी माँ के मरने के बाद बेसहारा हो गये थे। जिन बच्चों का चित्र बनाकर चित्रा ने प्रसिद्धि प्राप्त की थी, उन्हीं बच्चों को अरुणा ने माँ की तरह पाल पोस कर बड़ा किया था। प्रदर्शनी में अरुणा के साथ वही दोनों बच्चे थे।
छह या सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. 'दो कलाकार’ कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'दो कलाकार’ मन्नू भंडारी द्वारा लिखित एक उद्देश्यपूर्ण कहानी है। इस कहानी में लेखिका ने मानवीय गुणों को कला से बढ़कर माना है। कहानी में अरुणा और चित्रा दो सहेलियाँ हैं। चित्रा एक प्रसिद्ध चित्रकार है। वह अपने चित्रों से देश-विदेश में प्रसिद्धि पाती है। मरी हुई भिखारिन व उसके साथ चिपक कर रोते हुए बच्चों का चित्र बनाकर वह बहुत नाम कमाती है, लेकिन अरुणा उन्हीं बच्चों को पाल पोस कर बड़ा करती है और उन्हें माँ का प्यार देती है। इस कारण वह चित्रा से भी बड़ी कलाकार कहलाती है। अतः इस कहानी में लेखक का उद्देश्य यह बताना है कि कलाकार में मानवीय गुणों का होना अति आवश्यक है।
प्रश्न 2. ‘दो कलाकार’ के आधार पर अरुणा का चरित्र चित्रण करें।
उत्तर: अरुणा ‘दो कलाकार’ कहानी की एक मुख्य पात्रा है। वह एक सच्ची समाज सेविका है। वह मानवीय गुणों से भरपूर है। छात्रावास में रहते हुए ग़रीबों, चपरासियों आदि के बच्चों को वह निःशुल्क पढ़ाती है। किसी के दु:ख को देखकर द्रवित हो उठती है। फुलिया दाई के बीमार बच्चे की सेवा करती है। बच्चे की मृत्यु के पश्चात बहुत दुःखी होती है। जिस भिखारिन के चित्र को बनाकर उसकी सहेली चित्रा देश-विदेश में ख्याति पाती है, अरुणा उन्हीं बच्चों का माँ बनकर पालन-पोषण करती है। इस तरह वह अपनी महानता का परिचय देती है। इस प्रकार अरुणा अपने मानवीय गुणों के कारण चित्रा से भी बड़ी कलाकार बन जाती है।
प्रश्न 3. चित्रा एक मंझी हुई चित्रकार है, आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर: चित्रा एक मंझी हुई चित्रकार है। हम इस कथन से पूर्णतया सहमत है। चित्रा को चित्रकला का बहुत शौक है। वह अपना अधिकतर समय चित्र बनाने में व्यतीत करती है। अत्यंत संवेदनशील होने के कारण वह अपने चित्रों में जान भर देती है। मरी हुई भिखारिन और उसके रोते हुए बच्चों का चित्र बनाकर वह देश विदेश में प्रसिद्धि पाती है। उसकी कला संवेदनशीलता का उदाहरण है। इस तरह हम कह सकते हैं कि चित्रा एक मंझी हुई चित्रकार है।
प्रश्न 4. ‘दो कलाकार’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'दो कलाकार' शीर्षक हमारे विचार में पूर्णतया सार्थक है। अरुणा और चित्रा दोनों सखियों को लेखिका ने दो कलाकार माना है। चित्रा अपनी चित्रकला के कारण एक कलाकार का दर्जा पाती है, वही अरुणा अपने मानवीय गुणों के कारण चित्रा से भी बड़ी कलाकार कहलाती है। जिस भिखारिन और उसके रोते हुए बच्चों का चित्र बनाकर चित्रा देश-विदेश में प्रसिद्धि पाती है, उन्हीं अनाथ बच्चों का पालन पोषण कर अरुणा चित्रा से भी बड़ी कलाकार कहलाती है। इस तरह इस कहानी का शीर्षक ‘दो कलाकार’ पूर्णतया उपयुक्त शीर्षक है।
पाठ - 10: नर्स (कला प्रकाश)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. महेश कितने साल का था?
उत्तर: महेश छह साल का था।
प्रश्न 2. महेश कहाँ दाखिल था?
उत्तर: महेश अस्पताल में दाखिल था।
प्रश्न 3. अस्पताल में मुलाक़ातियों के मिलने का समय क्या था?
उत्तर: अस्पताल में मुलाक़ातियों के मिलने का समय शाम चार से छः बजे का था।
प्रश्न 4. वार्ड में कुल कितने बच्चे थे?
उत्तर: वार्ड में कुल बारह बच्चे थे।
प्रश्न 5. सात बजे कौन-सी दो नसें वार्ड में आईं?
उत्तर: सात बजे मरींडा और मांजरेकर नाम की दो नसें वार्ड में आईं थीं।
प्रश्न 6. महेश किस सिस्टर से घुल मिल गया था?
उत्तर: महेश सिस्टर सूसान से घुल-मिल गया था।
प्रश्न 7. महेश को अस्पताल से कितने दिन बाद छुट्टी मिली?
उत्तर: महेश को तेरह दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली।
तीन या चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. सरस्वती की परेशानी का क्या कारण था?
उत्तर: सरस्वती का बेटा अस्पताल में दाखिल था। उसका ऑपरेशन हुआ था। सरस्वती उससे मिलने अस्पताल आई थी तो वह उससे लिपट कर रोने लगा। वह उसे वहाँ से जाने नहीं दे रहा था और उसकी कोई बात नहीं सुन रहा था। बेटे का इस प्रकार रोना सरस्वती की परेशानी का कारण था。
प्रश्न 2. सरस्वती ने नौ नंबर वाले बच्चे से क्या मदद मांगी?
उत्तर: सरस्वती को नौ नंबर बेड वाला बच्चा ज़्यादा समझदार लग रहा था। वह दस वर्ष का होगा। सरस्वती ने उसे पास बुला कर कहा कि वह उसके बेटे महेश को बातों में लगाए और उसे कोई कहानी आदि सुनाए ताकि वह वहाँ से बाहर जा सके। लड़के ने सरस्वती की बात मान ली और उसकी मदद को तैयार हो गया। वह महेश के पास जाकर बात करने लगा और इसी बीच सरस्वती वहाँ से बाहर आ गई।
प्रश्न 3. सिस्टर सूसान ने महेश को अपने बेटे के बारे में क्या बताया?
उत्तर: जब सिस्टर सूसान ने महेश को रोते देखा था तो उसने महेश को बताया कि उसका बेटा भी उसी की भाँति रोता है। वह बहुत शैतान है। उसका नाम भी महेश है। वह अभी तीन महीने का है। बिल्कुल छोटा-सा है। उसने महेश को यह भी बताया कि आया जब उससे खेलती या गाना गाती है तो वह खुशी से हाथ पैर ऊपर नीचे करने लगता है जैसे नाच रहा हो। महेश के पूछने पर वह उसे बताती है कि उसके बेटे को अभी बोलना नहीं आता। इसलिए वह अभी ‘अगूँ,अगूँ......गूँ,गूँ......’ बोलता है।
प्रश्न 4. दूसरे दिन महेश ने माँ को घर जाने की इजाज़त खुशी-खुशी कैसे दे दी?
उत्तर: महेश ने अपनी माँ को घर जाने की इजाज़त खुशी-खुशी दे दी थी क्योंकि सिस्टर सूसान के छोटे से बेटे की बातें सुनकर उसने अपनी माँ के बारे में सोचा था। उसे अपनी छोटी बहन मोना के रोने की चिंता थी, जिसे मम्मी पास वाले राजू के घर छोड़ आई थी। वह नहीं चाहता था कि उसके रोने से माँ को किसी प्रकार की परेशानी हो।
प्रश्न 5. सरस्वती द्वारा सिस्टर सूसान को गुलदस्ता और उसके बबलू के लिए गिफ़्ट पेश करने पर सिस्टर सूसान ने क्या कहा?
उत्तर: सरस्वती द्वारा सिस्टर सूसान को गुलदस्ता और उसके बबलू के लिए गिफ़्ट पेश करने पर सिस्टर सूसान ने कहा, “रंग-बिरंगे सुंदर फूलों वाला यह गुलदस्ता तो मैं खुशी से ले रही हूँ। बाकी यह गिफ़्ट किसी ऐसी स्त्री को दे दीजिए, जिसका कोई बबलू हो। मेरा तो कोई बबलू है नहीं, मैंने तो अभी शादी ही नहीं की है।”
छह या सात पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. सिस्टर सूसान का चरित्र चित्रण अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: सिस्टर सूसान 'नर्स' कहानी की प्रमुख पात्रा है। उसका पेशा नर्स है और नर्स के सभी गुण उसमें मौजूद हैं। उसके लिए नर्सिंग केवल एक व्यवसाय ही नहीं बल्कि मानवता की सेवा भी है। कहानी में वह केवल रोगी का इलाज और देखभाल ही नहीं करती बल्कि रोगी की मन:स्थिति से परिचित होकर उसके अनुरूप व्यवहार भी करती है। जब अस्पताल में दाखिल छह वर्षीय महेश को अपनी माँ के बिना अच्छा नहीं लगता तो ऐसे में सिस्टर सूसान चिकित्सा और उपचार के अतिरिक्त अपनी बातचीत और व्यवहार से उसे माँ जैसी ममता, स्नेह और सुरक्षा प्रदान करती है। सिस्टर सूसान का व्यवहार और आत्मीयता महेश के लिए किसी भी औषधि से अधिक उपयोगी साबित होता है। सिस्टर सूसान महेश का विश्वास जीत उसका मनोबल बढ़ाती है और प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल परिस्थिति में बदल देती है।
प्रश्न 2. 'नर्स' कहानी का उद्देश्य अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 'नर्स' कहानी का उद्देश्य नर्स के सेवाभाव और ममत्व को रोगी के हित में प्रस्तुत करना है। साथ ही एक बच्चे और माँ के मनोभावों को भी सशक्त ढंग से अभिव्यक्त करना है। नर्सिंग केवल एक व्यवसाय, पेशा या करियर नहीं है बल्कि मानवता की सेवा है। नर्स अस्पताल का अभिन्न हिस्सा होती है। नर्स का कर्तव्य रोगी का इलाज करना, उसकी देखभाल करना ही नहीं बल्कि उसका दायित्व रोगी की मन:स्थिति से परिचित होकर उसके अनुरूप व्यवहार करना भी है। इस कहानी में अस्पताल में दाखिल छह वर्षीय महेश को अपनी माँ के बिना अच्छा नहीं लगता। ऐसे में सिस्टर सूसान चिकित्सा और उपचार के अतिरिक्त अपनी बातचीत और व्यवहार से उसे माँ जैसी ममता, स्नेह और सुरक्षा प्रदान करती है। सिस्टर सूसान का व्यवहार और आत्मीयता महेश के लिए किसी भी औषधि से अधिक उपयोगी साबित होती है। सिस्टर सूसान महेश का विश्वास जीत उसका मनोबल बढ़ाती है और प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल परिस्थिति में बदल देती है।
पाठ - 11(i): माँ का कमरा (श्यामसुंदर अग्रवाल)
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. बुज़ुर्ग बसंती कहाँ रह रही थी?
उत्तर: बुज़ुर्ग बसंती छोटे-से पुश्तैनी मकान में रह रही थी।
प्रश्न 2. बुज़ुर्ग बसंती को किस का पत्र मिला?
उत्तर: बुज़ुर्ग बसंती को अपने बेटे का पत्र मिला।
प्रश्न 3. बसंती की पड़ोसन कौन थी?
उत्तर: बसंती की पड़ोसन रेशमा थी।
प्रश्न 4. बसंती बेटे के साथ कहाँ आई?
उत्तर: बसंती बेटे के साथ शहर आई।
प्रश्न 5. कोठी में कितने कमरे थे?
उत्तर: कोठी में तीन कमरे थे।
प्रश्न 6. नौकर ने बसंती का सामान कहाँ रखा?
उत्तर: नौकरों ने बसंती का सामान बरामदे के साथ वाले कमरे में रखा।
प्रश्न 7. बसंती के कमरे में कौन-कौन सा सामान था?
उत्तर: बसंती के कमरे में एक डबल बैड बिछा था, गुसलखाना भी साथ था। उस कमरे में एक टी.वी., एक टेपरिकॉर्डर और दो कुर्सियां पड़ी थीं। बैड पर गद्दे बहुत नरम थे।
तीन-चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. बेटे ने पत्र में अपनी माँ बसंती को क्या लिखा?
उत्तर: बेटे ने पत्र में अपनी माँ बसंती को लिखा कि उसकी तरक्की हो गई है। कंपनी की ओर से उसे बहुत बड़ी कोठी रहने को मिली है। अब तो उसे उसके पास शहर में आकर रहना ही होगा। वहाँ उसे कोई तकलीफ नहीं होगी।
प्रश्न 2. पड़ोसन रेशमा ने बसंती को क्या समझाया?
उत्तर: पड़ोसन रेशमा ने बसंती को समझाया कि उसे बेटे के पास रहने के लिए शहर नहीं जाना चाहिए। शहर में बहू-बेटे के पास रहकर बहुत दुर्गतित होती है। उनके साथ नौकरों जैसा व्यवहार किया जाता है। यहाँ तक कि खाने पीने को भी समय से नहीं दिया जाता। कुत्ते से भी बुरी हालत हो जाती है।
प्रश्न 3. बसंती क्या सोचकर बेटे के साथ शहर आई?
उत्तर: पड़ोसन रेशमा की बातें सुनकर बसंती थोड़ा डर गई थी परंतु अगले दिन जब उसका बेटा कार लेकर आ गया तो बेटे की ज़िद के आगे बसंती की एक न चली। तब वह यह सोच कर उसके साथ चली गई कि 'जो होगा देखा जाएगा'।
प्रश्न 4. बसंती के कमरे में कौन-कौन सा सामान था?
उत्तर: बसंती को अपना कमरा स्वर्ग जैसा सुंदर लगा। उस कमरे में एक डबल बैड बिछा था, गुसलखाना भी साथ था। उस कमरे में एक टी.वी., एक टेपरिकॉर्डर और दो कुर्सियां पड़ी थीं। बैड पर गद्दे बहुत नरम थे।
प्रश्न 5. बसंती की आँखों में आँसू क्यों आ गए?
उत्तर: बसंती ने जैसा नकारात्मक व्यवहार सोचा था, उसके पुत्र का व्यवहार उससे बिल्कुल विपरीत था। उसने ऐसा सुख भरा जीवन कभी नहीं जिया था। उसके पुत्र ने आजकल के स्वार्थी पुत्रों जैसा व्यवहार नहीं किया था। अब वह अपने पुत्र के साथ सुखपूर्वक रह सकेगी। इस प्रकार पुत्र का स्नेहपूर्ण व्यवहार पाकर बसंती की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
प्रश्न 6. 'माँ का कमरा' कहानी का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: 'माँ का कमरा' एक उद्देश्यपूर्ण कहानी है। लेखक का मुख्य उद्देश्य बुज़ुर्गों की स्थिति को बेहतर बनाना और समाज में विघटित हो रहे मूल्यों को पुनः स्थापित करना है। लेखक यह भी बताना चाहता है कि हमें कभी भी किसी की बातों में नहीं आना चाहिए। यदि इस कहानी में बसंती अपनी पड़ोसन रेशमा की बातों में आकर अपने बेटे के साथ न जाती तो वह उसके स्नेहपूर्ण व्यवहार से वंचित रह जाती। इस प्रकार लेखक का उद्देश्य समाज की मानसिकता में बदलाव लाना भी है। यह कहानी हमें निराशा से आशा की ओर लेकर जाती है और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की शिक्षा देती है।
पाठ - 11(ii): अहसास (लघुकथा) - उषा आर. शर्मा
एक या दो पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. दिवाकर की नए स्कूल में किसने मदद की?
उत्तर: दिवाकर की नए स्कूल में अध्यापिका नीरू मैडम ने मदद की।
प्रश्न 2. स्कूल बस में छात्र-छात्राएँ कहाँ जा रहे थे?
उत्तर: स्कूल बस में छात्र-छात्राएँ शैक्षिक भ्रमण के लिए रोज़ गार्डन जा रहे थे।
प्रश्न 3. छात्राएँ बस में क्या कर रही थीं?
उत्तर: छात्राएँ बस में अंताक्षरी खेल रही थीं।
प्रश्न 4. दिवाकर बस में बैठा क्या देख रहा था?
उत्तर: दिवाकर बस में बैठकर खिड़की के बाहर वृक्षों को तथा दूर तक फैले आसमान को देख रहा था।
प्रश्न 5. दिवाकर को अपने मन में अधूरेपन का अहसास क्यों होता था?
उत्तर: दिवाकर अपाहिज था और दूसरे बच्चों की भाँति उछल-कूद नहीं सकता था। इसलिए उसे अपने मन में अधूरे पन का अहसास होता था।
प्रश्न 6. कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राएँ क्या देख कर डर गए?
उत्तर: कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राएँ साँप को देखकर डर गए।
तीन-चार पंक्तियों में उत्तर
प्रश्न 1. दिवाकर बैंच पर बैठकर क्या सोच रहा था?
उत्तर: रोज़ गार्डन में सभी बच्चे उछल कूद रहे थे और झूलों का आनंद ले रहे थे। दिवाकर एक बैंच पर बैठ गया था। उनको देखकर दिवाकर को दो साल पहले की बात याद आ गई, जब वह अपनी बड़ी मौसी के पास दिल्ली गया था और फन सिटी में उसने भी बहुत मस्ती की थी।
प्रश्न 2. साँप को देखकर दिवाकर क्यों नहीं डरा?
उत्तर: शहर आने से पहले दिवाकर गाँव के स्कूल में पढ़ता था। वह गाँव में खेतों में कई बार साँप और अन्य जानवरों को देख चुका था। साँप को देखना उसके लिए कोई नई बात नहीं थी, इसीलिए वह साँप को देखकर नहीं डरा।
प्रश्न 3. दिवाकर ने अचानक साँप को सामने देखकर क्या किया?
उत्तर: रोज़ गार्डन में इतने बड़े साँप को अचानक अपने सामने देखकर छात्र-छात्राओं के चेहरे का रंग उड़ गया परंतु दिवाकर बिल्कुल भी नहीं घबराया। किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था। ऐसे में दिवाकर चीते की सी फुर्ती के साथ वहाँ पहुँच गया। उसकी निगाहें साँप पर थीं और उसने अचानक अपनी बैसाखी से साँप को उठाकर दूर फेंक दिया।
प्रश्न 4. दिवाकर को क्यों पुरस्कृत किया गया?
उत्तर: रोज़ गार्डन में दिवाकर ने साँप को बड़ी बहादुरी से दूर फेंक कर सभी बच्चों और अध्यापक की जान बचाई थी। इसीलिए उसकी सूझबूझ व बहादुरी के कारण प्रातःकालीन सभा में प्राचार्य महोदय ने उसे पुरस्कृत किया और उसे अपनी पूर्णता का अहसास दिलाया।
प्रश्न 5. लघुकथा 'अहसास' का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: 'अहसास' लघुकथा शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाले बच्चों में आत्मविश्वास जगाने वाली एक प्रेरणादायक लघुकथा है। दिवाकर के माध्यम से लेखिका यह बताना चाहती है कि शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाले बच्चे किसी से कम नहीं हैं। अगर किसी कारणवश उनमें कुछ कमी आ गई है तो ईश्वर ने उन्हें कुछ खास भी दिया है, जो दूसरों के पास नहीं है। बस उस 'खास' के अहसास की ज़रूरत होती है। इसी के साथ यह बतलाना भी लेखिका का उद्देश्य है कि अध्यापकों का सहयोग व सौहार्दपूर्ण व्यवहार इस प्रकार के बच्चों को बहुत मदद देता है। अतः लेखिका अपने उद्देश्य को स्पष्ट करने में पूर्ण रूप से सफल भी रही है।
प्रश्न 6. 'अहसास' नामकरण की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'अहसास' कहानी का नामकरण उसकी मूल भावना पर आधारित है। यह शीर्षक अत्यंत आकर्षक व भावपूर्ण है। कहानी का मुख्य पात्र दिवाकर अपाहिज होने के कारण स्वयं को अपूर्ण समझता है, परंतु जब वह एक साँप से सभी की रक्षा करता है तो प्रातः कालीन सभा में प्राचार्य महोदय उसे सम्मानित करते हैं। तब तालियों की गड़गड़ाहट में उसे भी अपनी पूर्णता का अहसास होता है। उसके नीरस जीवन में सरसता का संचार हो जाता है। उसके मन का बदला हुआ यह भाव और अहसास ही इस कहानी का शीर्षक बना है। इस प्रकार इस कहानी का शीर्षक सर्वथा सार्थक है क्योंकि सारी कहानी इसी शीर्षक के साथ जुड़ी हुई है और इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।